sc/st आरक्षण क्या है
नौकरी में आरक्षण के नियम
राजस्थान में आरक्षण की वर्तमान स्थिति
sc/st आरक्षण कितना है 2024
sc/st आरक्षण कब लागू हुआ
Sc St के मुद्दे पर राजनीतिक दल जो है मुद्दे पर अपनी रोटियां देखने से बात नहीं आते उनके लिए यह रोटियां सीखने का एक मध्यम वर्ष है और सुप्रीम कोर्ट लगातार इस पॉलिसी की जिसका नाम है रिजर्वेशन इसकी व्याख्या करता रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी रिजर्वेशन को लेकर संवैधानिक पीठ साथ डिजिटल की बेंच बैठी थी इसमें से बहुमत से जो है एक निर्णय आया है क्या है यह रिजर्वेशन का निर्णय इससे क्या बदलाव होगा एससी एसटी
SC/ ST कोटा में क्या परिवर्तन आएगा क्या इसमें जनरल यानी अनरिजर्व्ड कैटिगरी और ओबीसी वालों पर भी कोई प्रभाव पड़ेगा आज में डिटेल में इसकी पड़ताल करने वाला हूं और आपको एक-एक जानकारी दे रहा हूं sc St को दिए कोटा संवैधानिक है एससी एसटी कोटा मतलब रिजर्वेशन में रिजर्वेशन गी जस्टिस मिश्रा साहब फार्मूला चाहिए नहीं करते क्या परिवार की एक ही पीढ़ी को रिजर्वेशन मिलना चाहिए गी साहब इस बारे में कोई जिक्र नहीं करतेवहीं कुर्ते में कोटा संवैधानिक नहीं है और सारथी को एससी कोटा में क्रिमी लेयर फार्मूले को लाने के बारे में भी अस्ति जीत रही है लेकिन क्या एक ही पीढ़ी को रिजर्वेशन मिलना चाहिए मतलब एक sc St को रिजर्वेशन का फायदा मिल गया तो दूसरी पीढ़ी को रिजर्वेशन का फायदा नहीं मिलना चाहिए इस बारे में जस्टिस पंकज मित्तल सहमति जाता रहे हैं कि हां परिवार की एक पीढ़ी को रिजर्वेशन मिल गया तो अब दूसरी पीढ़ी को रिजर्वेशन नहीं मिलना चाहिए वही चंद्रचूड़ साहब मिश्रा साहब नाथ साहब शर्मा साहब और द्विवेदी मैं यह इस बारे में कोई भी जिक्र कर नहीं रहे हैं और बहुत विस्तार से इस निर्णय की पड़ताल करते हैं तो समझते हैं
पंजाब सरकार ने 2006 में कानून बनाया था इस कानूनके क्षेत्र 4 सबसेक्शन 2 में कहा गया था कि सरकारी नौकरियों में 25% रिजर्वेशन अनुसूचित जातियों को और 12% रिजर्वेशन अन्य पिछड़ा वर्ग को दिया जाएगा इसी कानून के क्षेत्र 4 सब्जेक्ट क्षेत्र 5 में कहा गया अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व कुल सीटों में से 50% सीटों पर रिजर्वेशन वाल्मीकियों और मजा भी सिखों को दिया जाएगा इस कानून के क्षेत्र 4 क्षेत्र 5 को और संवैधानिक विद्यार्थी हुए देवेंद्र सिंह नाम के पिटीशन में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में इस कानून को चुनौती दी 2010 में हाईकोर्ट में अपने फैसले में इस कानून को असंवैधानिक बढ़कर खत्म कर दिया अब इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के साथ न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ बैठी थी जिन्होंने 6:1 के रेशों के आधारपर मन की एसी को उसमें शामिल जातियों के आधार पर बांटना संविधान के आर्टिकल 341 के खिलाफ नहीं है कोर्ट में अपने फैसले में राज्यों के लिए जरूरी हिदायत विधि है कहां है कि राज्य सरकारी मनमर्जी से फैसला नहीं कर सकती और इसके लिए कुछ शर्ते होंगी पहले शर्त तो यह होगी कि अनुसूचित जाति के भीतर किसी एक जाति को 100% कोटा नहीं दिया जा सकता दूसरी बार की गई कि अनुसूचित जाति में शामिल किसी जाति का कोटा तय करने से पहले उसके हिस्सेदारी का पुख्ता उत्तर होना चाहिए कि क्या अब एससी केटेगरी में भी क्रीमी लेयर बनाकर उनमें शामिल कुछ जातियों को रिजर्वेशन से बाहर किया जा सकेगा तो इसका उत्तर यह है कि 1990 के दशक में मंडल आयोग की रिपोर्ट के बाद ओबीसी के आरक्षण में क्रीम ए लेयर फार्मूले को लागू किया गया था उसी तर्ज पर अब एससी केटेगरी में भी सुप्रीम कोर्ट ने जातियों के वर्गीकरण के लिए राज्यों पर अधिकार दे दिया है जस्टिस दवाई के अनुसार इस वर्गीकरण में किसी एक कर क्रांतिकारी को 100% दिया आरक्षण नहीं दिया जा सकेगा सिद्धांत व्यक्तियों पर लागू होता है जातियों पर नहीं ऐसे में किसी एक परिवार को क्रिमिनल में शामिल होने के आधार पर आरक्षण के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता क्रीमी लेयर के फार्मूले के अनुसार किसी जाति को एससी आरक्षण के दायरे से बाहर करना मुश्किल होगाआपको एक बार और बताओ कि सुप्रीम कोर्ट के साथ में से चार्ज होने इस मामले में अपने फैसले में लिखा है कि राज्य ओबीसी की तरह ऐसी रिजर्वेशन में भी क्रिमिनल की पहचान करने के लिए फैसला ले सकते हैं मतलब बिल्कुल साफ है कि अब राज्य सरकारों पर निर्भर करेगा कि वह कोटा में कोटा जारी करने के लिए अनुसूचित जातियों को क्रीमी और नॉन क्रीमी लेयर में बांटना चाहते हैं या नहीं चाहते हैं जस्टिस पंकज मित्तल ने अपने फैसले में जस्टिस बी गवाही को कोर्ट करते हुए कहा कि अगर कोई मिश्रा आईएएस या आईपीएस बन जाता है तो समझ में उसका स्टेटस बढ़ाने के बावजूद उसके बच्चों को रिजर्वेशन के पूरे फायदे मिलेंगे क्योंकि कुछ लोगों की तरह की से पूरी कास्ट का पिछड़ापन दूर नहीं होता पूरी जाति को आरक्षण से दूर नहीं किया जा सकता पंकज ने कहा कि जिस परिवार में एक बार आरक्षण का फायदा उठा लिया है उसे अगली वीडियो में आरक्षण का फायदा लेने देना नहीं चाहिए ऐसे परिवारों के लिए आरक्षण सिर्फ एक पीढ़ी तक सीमित होना चाहिए भविष्य मेंआरक्षण सिर्फ सरकारी नौकरियों के लिए ही है या फिर एडमिशन और संसद में भी इसका असर होगा तो आपको जानकारी दे दूं कि शैक्षणिक और आर्थिक पिछलापन के आधार पर देश में आरक्षण दिए जाते रहे हैं जजों ने अपने फैसले में कहा है कि ऐसी समुदाय में पिछड़े हुए वर्ग को प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण देने से संविधान की समानता के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा आर्थिक स्थिति सुधारने का पता चलता है ऐसे में क्रीमी लेयर के दायरे में आने वाले लोगों को नौकरियों के आरक्षण से वंचित किया जा सकता है लेकिन संसद और विधानसभा में एससी एसटी के आरक्षण में इस फैसले का प्रभाव नहीं पड़ेगा आपको एक जानकारी और दे दूं कि एजुकेशन इंस्टिट्यूट और एडमिशन और संसद को लेकर इस फैसले में कुछ भी नहीं कहा गया है तो संक्षेप में समझे कि जैसे मान लेते हैं कुछ जातियां हैं जिनको अनुसूचित जातियां कहा गया अनुसूचित जातियां क्या है यह शेड्यूल कास्ट क्या होता है यह भी मैं आसान से समझा दूं एक्चुअली देश के राष्ट्रपति ऐसी जातियों को लेकर के सूची तैयार करते हैं लिस्ट तैयार करते हैं जो सामाजिक आधार पर पिछड़े हुए हैं जिनको आगे आने का मौका नहीं मिला ऐसा वह राज्य के राज्यपाल से परामर्श करके बनाते हैंआर्टिकल 341 है इंडियन कांस्टीट्यूशन अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है अब भारतीय है कि मान लेते हैं एक जाती है उसे जाति में मानव 100 लोग हैं एक एग्जांपल लेते हैं उसे 100 में से 30 ऐसे परिवार है जिनको आगे आने का मौका मिल गया आगे आने का मौका मिल गया मतलब वह समृद्ध हैं उनके परिवार में दो-तीन लिए कुछ ऐसा काम कर रहे हैं जो जिनके आधार पर उनका विस्थापन घट गया है लेकिन वह 70 लोग 70 लोग जिनको आगे आने का मौका ही नहीं मिला तो सुप्रीम कोर्ट का यह जो निर्णय है वह यह कह रहा है कि वह जो लोग जिनको आगे आने का मौका नहीं मिला है अब उनको फायदा मिले और यह 30 लोग जिनका फायदा मिल चुका है बार-बार उसका फायदा ना लेते रहे की क्या पहले भी कोटे में कोटा यानी रिजर्वेशन मेंरिजर्वेशन देने की कोशिश हुई है अगर ऐसा हुआ है तो कब और उसका प्रभाव क्या हुआ है तो आपको जानकारी दे दूं इससे पहले भी ऐसी कोशिश की गई है पंजाब में 2006 में एक कानून लेकर आया गया था जिसमें शेड्यूल कास्ट कोटा में वाल्मीकि और मजे भी सिखों को 50% आरक्षण नौकरी में देने की बात कही गई थी 2010 में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने इसे संवैधानिक बताया था और कानून को खत्म कर दिया गया था आंध्र प्रदेश में भी ऐसा हुआ विधानमंडल ने 57 अनुसूचित जातियों को उप समूह में बांटने के लिए विधानसभा में कानून बनाया इसका मकसद अनुसूचित जातियों के अंदर एक वर्ग को शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 15% आरक्षण देना था हालांकि इस कानून को 2005 में सुप्रीम कोर्ट में ही अनकंस्टीट्यूशनल डिक लार कर दिया था फिर 2007 में बिहार राज्य में अनुसूचित जातियों को रिजर्वेशन में कोटे के भीतर कोटा देने के लिए पिछड़ी जातियों की पहचान के लिए महाड दलित आयोग का गठन कर दिया था इस आयोग ने बताया कि बिहार में गरीब 10% महा दलित है 2010 विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने एससी कोटे के अंदर महा दलित के लिए अलग से रिजर्वेशन लागू करने की कोशिश की थी हालांकि इसमें कामयाब नहीं होने पर बाद में उन्होंने महादलित को घर और जमीन देने के लिए कई योजनाएं शुरू कीआपको जानकारी दे दो कि हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस रामचंद्र राजू की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी इस कमेटी ने अपने रिपोर्ट में बताया कि राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी 16 प्रतिशत होने के बावजूद उनके पास केवल पांच प्रतिशत नौकरियां है ऐसे में कोटे में कोटा देकर इस समुदाय के सभी लोगों को लाभ दिया जा सकता है इसके आधार पर ही अगस्त 2020 में तमिलनाडु सरकार ने अनुसूचित जाति कोट के भीतर अरूंधतियार जाति को तीन परसेंट कोटा दे दिया था 18 जनवरी 2024 को कर्नाटक में सिद्धार्थरमैया सरकार शोषण करने की सिफारिश करेगी जिससे दलितों के लिए इंटरनल रिजर्वेशन मिल सके कर्नाटक के सोशल वेलफेयर मिनिस्टर स महादेवप्पा ने कहा था कि जब तक आर्टिकल 341 में संशोधन नहीं किया जाएगा तब तक कुछ नहीं हो सकता अंतिम बार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का क्या असर होगा अगर आप सकारात्मक नजरिया से देखें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सकारात्मक का सरिया होगा कि अनुसूचित जातियों में जिनको आगे आने का मौका नहीं मिला है अब शायद उनके लिए सामाजिक जो एकता है सामाजिक सामने है जिसे हम सोशल जस्टिस या सोशल इक्वलिटी कहते हैं वह अब अर्जित किया जा सकेगा मुझे उम्मीद है कि कम शब्दों में मैं इस बारे में आपको ठीक-ठाक जानकारी दे दी होगी कुछ और आप इस बारे में जानना चाहते हैं तो

